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मेरी कहानी बहुत पहले शुरु हुई थी। उसमें मेरा अनुभव है जिसे शब्दों के धागों से बांधकर मैंने कोरे पन्नों पर उकेरा है। मेरे साथ इस सफर में कई लोग जुड़े, मगर अब्दुल और सादाब से मुझे बेहद लगाव है। अब्दुल तो कब का चला गया, सादाब पता नहीं कितने दिन और मेरे साथ रहेगा। उसकी मां से मैं मिलना चाहता हूं। मुझे काफी अच्छा लगेगा।
जब हम दुनिया से दूर होते हैं, तब हमें अपनेपन की तलाश रहती है। कुछ लोग इस बीच ऐसे ही मिल जाते हैं। उनसे ढेर सारी बातें होती हैं। बातें इतनी की वक्त कब गुजर गया पता ही नहीं चलता। उनमें अपनापन ढूंढने की जरुरत महसूस नहीं होती क्योंकि हम उन्हें अपना पहले ही मान चुके होते हैं। उनकी एक पल की मुस्कराहट जानें कितने जनमों की थकान दूर कर देती है। उनकी मुस्कराहट हमारे मन को हरा कर जाती है। उनकी एक मुस्कराहट हमारी ऊर्जा को कई गुना बढ़ा जाती है। उनकी हल्की मुस्कराहट जीवन जीने का तरीका बदल जाती है। उनकी मुस्कराहट हमें सुकून पहुंचाती है।
हमारी दुनिया बदल जाती है और हम अलग संसार के मीठे पलों में जीना शुरु कर देते हैं। हम उन लोगों को अपना मान कर उन्हें अपना हाल सुनाते हैं। हम विश्वास करने लग जाते हैं कि हमारी दुनिया का वे भी एक हिस्सा हैं। उनकी जिंदगी के उतार-चढ़ावों को महसूस करते हैं। उनके गमों की झोली का भार हम उन्हें बांटकर कम कर लेते हैं।
जीने का मतलब समझ आने लगता है। ऐसा बहुत कुछ हमारे मन को लगता है जिससे हम एक तरह की संतुष्टि का अनुभव करते हैं। दिल की बातों को उनसे छिपाने का साहस नहीं होता। लगभग विचारों के एक समागम का प्रारंभ हो रहा होता है जिससे दो अजनबियों के बीच की दूरियां सिमट रही होती हैं। हम अनजान होकर भी अनजान नहीं होते। इससे वास्ता हमारे जीवन को है। तन्हाईयों को कम कर वक्त में कई पल की खुशियां खालीपन को भी सिमेती हैं। अपनापन क्या होता है यह तब पता लगता है। अपनों का सुख कैसा होता है, इसका एहसास भी तभी होता है।
मुझे अपने नहीं मिले क्योंकि मैं एक वीरान, नीरस और उधड़े हुए संसार में रहने वाला एक कैदी हूं, जिसे लोग हत्यारा कहते हैं। यादों का बसेरा धीरे-धीरे बिखर रहा है जिसके तिनके इधर-उधर छिटक कर टूटे फर्श पर फैल गये हैं। स्मृतियों का मौसम पतझड़ में बदल गया है। उनका धुंधलापन समय की देन है। समय की ताकत अद~भुत है। कितना संभल कर इंसान क्यों न चले समय का मामूली थपेड़ा उसे हिला कर रख देता है।
contd....
-harminder singh
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आईये जानें .... मन क्या है!
ReplyDeleteआचार्य जी
बहुत संवेदनशील...
ReplyDeleteआपने भावुक कर दिया । अगली कडी की प्रतीक्षा रहेगी हरमिंदर जी
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